1/30/2009

मंजूर नहीं है

राम-राम क्या खूब कही है,
हाथ में चाबुक औरर बही है ।

मुँह मेरा आवाज़ तुम्हारी,
हम झूठे पर आप सही हैं।

पैरों में गिरना, मर जाना
क्या इनकी तकदीर यही है ?

माई-बाप हैं आप हमारे,
आपसे आगे कोई नहीं हैं ।

सिर झुक जाए सबके आगे
ये हमको मंजूर नहीं है ।
-----



आशीष दशोत्तर ‘अंकुर’ की एक गजल



यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्‍‍य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्‍य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर-19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001

कृपया मेरे ब्लाग
‘एकोऽहम्’ http://akoham.blogspot.com
पर भी नजर डाले।

3 comments:

  1. बहुत बढिया।बधाई।

    ReplyDelete
  2. अच्छा लिखा है।बधाई।

    ReplyDelete
  3. पैरों में गिरना, मर जाना
    क्या इनकी तकदीर यही है ?
    बहुत ही भावुक कविता कही आप ने.
    धन्यवाद

    ReplyDelete

अपनी अमूल्य टिप्पणी से रचनाकार की पीठ थपथपाइए.