2/25/2009

झूठ का ही राज है

खोखला है ज़िस्म और खोखली ही जान है,
ये कोई इक बुत नहीं, अपना हिन्दुस्तान है ।

इसकी हर दीवार पर थी अम्न की इबारतें
गोलियों बारुद से अब भर गया मकान है ।

जिन फ़िजाओं में कभी होता था लोगों का मिलन,
आज सारे रास्ते क्यों बन गए वीरान हैं ?

झूठ हर जुबान पर है, झूठ का ही राज है,
सच तो हर पल मर रहा बिक रहा ईमान है ।

वहशत के दौर में क्या कुछ नहीं हमने सहा,
आदमी की भीड़ है, जाने कहाँ इन्‍सान है ।
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आशीष दशोत्तर ‘अंकुर’ की एक गजल



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6 comments:

  1. इसकी हर दीवार पर थी अम्न की इबारतें
    गोलियों बारुद से अब भर गया मकान है
    बहुत अच्छा शेर कहा.

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  2. झूठ हर जुबान पर है, झूठ का ही राज है,
    सच तो हर पल मर रहा बिक रहा ईमान है ।

    वहशत के दौर में क्या कुछ नहीं हमने सहा,
    आदमी की भीड़ है, जाने कहाँ इन्‍सान है ।
    बहुत अच्छा कहा.

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  3. किस पंक्ति की प्रशंसा ज्यादा करे किस की कम। हर शब्द बोल रहा है,आज जा सच।बहुत-बहुत बधाई अंकुर जी को और विष्णु भैया फ़िर से आभार आपका।

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  4. झूठ हर जुबान पर है, झूठ का ही राज है,
    सच तो हर पल मर रहा बिक रहा ईमान है ।
    बहुत ही सुंदर प्रसुति की है आप ने , अंकुर जी का धन्यवाद इस कविता के लिये, ओर आप का धन्यवाद हम तक पहुचाने के लिये

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  5. बिल्‍कुल सही ...अंकुर जी का धन्यवाद .

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