4/13/2009

कलियुगी कमाल देखिये

हर बात पर सिर्फ़ बवाल देखिये,
खूनो-खंजर और धमाल देखिये ।

विक्षिप्त मानसिकता का दौर है यह,
बुझा-बुझा हर खयाल देखिये ।

गधे -घोड़े सभी जमे हैं कुर्सी पर,
वक्त का कलियुगी कमाल देखिये ।

रहनुमा जब राहजन बन गए हैं,
मिसालों में ऐसी मिसाल देखिए ।

व्यर्थ की बातों में दबा पड़ा है,
मेरा वो अहम् सवाल देखिये ।
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आशीष दशोत्तर ‘अंकुर’ की एक गजल



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3 comments:

  1. सुन्दर रचना के लिए बधाई।
    आप लिखते रहें।

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  2. आपको और आपके पुरे परिवार को वैशाखी की हार्दिक शुभ कामना !

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