12/21/2008

यादें


।। यादें ।।


नए शहर के अनजान माहौल में

हमें याद नहीं करना पड़ता,

बरबस ताजा हो उठता है

अपना गाँव, कोई मित्र ।

खाना खाते-खाते

माँ याद हो आती है

जैसे गाड़ी बिगड़ने पर

याद आ जाता है पुराना मिस्त्री ।

उदास होने पर

साहस दे जाती हैं वे बातें,

जो कही थीं सबने, बरसों पहले

घर से निकलते वक्त ।

जीवन में जब भी

मिलती है खुशी

पुराने साथी ही याद आते हैं

पहले-पहल ।

-----


‘सपनों के आसपास’ शीर्षक काव्य संग्रह से पंकज शुक्ला ‘परिमल’ की एक कविता

यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्‍य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्‍य भेजें । मेरा पता है - विष्‍णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर-19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.

कृपया मेरा ब्लाग ‘एकोऽहम्’ भी पढें ।

2 comments:

  1. बहुत सही लिखा आप ने
    धन्यवाद

    ReplyDelete

अपनी अमूल्य टिप्पणी से रचनाकार की पीठ थपथपाइए.